Sunday 8 November 2015

रात गयी बात गयी!



आज सुबह से ही मन बड़ा  प्रसन्न चित था को  खास बात नहीं थी पर  भी कभी आपको सब कुछ अच्छा लगता है  बड़े जोश  में तैयार हो कर घर से निकला.... बहार का माहौल  बड़ा ही मोहक और खुशबूदार था . ... तापमान अब 60-70 oF के करीब  गया था और सूरज देवता ने  आज निकल वातावरण में इक नयी ताजगी  सी भर दी  थी ……
 चेरी  ब्लोस्स्म का मौसम शुरू  होचुका था , मेरे घर के सामने  लगे पेड़ो पर कुछ लेमन रंग केकुछ गुलाबी रंग के, कुछ सफ़ेद रंग  के फूलो से पेड़ लदे गए थे ... कई तरह की चिड़ियाँ ना जाने कान्हा से आकर अपना घोसला उन पेड़ो पर बना रही थी…. टुलिप्स , डेफोडिल , ह्यासिन्थ्स  और अज़ेलिया  पनि पूरी रंगत के  साथ  खिल खिलाकर चारो तरफ रंग बिरंगी छठा के साथ अपनी लुभावनी खुसबू  बिखेर रहे थे। ....... मैं बड़े ही जोश और ख़ुशी गुण गुनगुनाता हुआ कार  चला रहा थाकी अचानक मेरी ख़ुशी और मूड पर ग्रहण लग गया ?.....सामने  इक  पुलिस की कार खड़ी  थी और उसके बहार इक पुलिस वाला अपनी स्पीडगन के  साथ खड़ा ...तेज निकलती गाडियों की  स्पीड मॉनिटर कर रहा  की  उसने मुझे इशारा किया ..की मैं अपनी गाड़ी साइड में  लगा लू .... मेरे गाड़ी साइड लगाते ही.... इक पुलिस ऑफिसर मेरे पास आकर बोला .. तुम्हे मालूम है? तुम किस स्पीड पे गाड़ी चला रहे हो ?.. उसकी आवाज सुन मैं चोंका! .... वोह पुलिस वाला नहीं..बल्कि  वाली थी ........

मेने अपना सर घुमा कर उसे देखाउसका चेहरा बिना मेकअप के भी खुबसूरत मॉडल की तरह लगता था उसके उभरे हुए गाल और रसीले लाल होट  किसी के होटों को मुजरिम बनाने के लिए ही काफी थे .... उसके  रेशमी सुनहरे बाल बड़ी बेतरबी से इक गुथे हुए जूडे की तरह से सर पे बंधे थे ... उसकी नीली आँखे बिना काजल और मस्कारे के भी किसी को शूट करने के लिए काफी थी ...अपनी कसी हुयी नीली वर्दी में भी वोह बला की खुबसूरत लगती थी...लगता था उसका छलकता योवन अपनी वर्दी की गुलामी से आजाद होने के लिए छटपटा रहा था.........

उसने अपने चेहरे को कठोर करते हुए कहा ..सर  अपना  लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन दिखाईये ..प्लीज  ..मैं तो उसके निर्दोष सोंदर्य में डूबा हुआ था .. मुझसे उसने जो माँगा मेने चुप चाप दे दिया .. उसने मुझे घुरा और इक कड़ी नजर डाली की मैं उसकी वर्दी का रोब खा जाऊं.... मैं ठहरा पागल दीवाना ...मुझे ना तो वर्दी दिख रही थी ना ही अपना जुर्म .. शायद उसे भी.... मुझ जैसे आशिक रोज मिलते थे और उसे पता था......की लोग उसे देख शायद अपनी सुध बुध खो देते है .......

थोड़ी देर बाद वोह आई और मेरे हाथ में फाइन का परचा पकड़ा कर बोली .. 135$ का है 80 $ स्पीडिंग के बाकी कोर्ट का खर्चा ..मेने चुप चाप कागज उससे लिया और अपनी मदहोशी में गाडी चलाने के लिए जैसे ही स्टेरिंग की तरफ झुका ..
उसने अपनी कातिल मुस्कराहट में कहा .. गुड डे सर ..और अपने नशीली आँखों  और कातिल मुस्कान दोनों से मुझे जिन्दा जला कर चली गयी ...
उसके जाने के बाद मैं नींद से जागा तो देखा आजा का दिन शुरू होने से पहले ही मैं 135$ का टोटा कर चूका था ... अब मूड पूरी तरह से बिगड़ गया था .. ...ऑफिस में भी ना जाने आज किस मनहूस घडी में प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो की मीटिंग में मेरे प्रोजेक्ट का बैंड बजा और मुझे वंहा भी अपनी लानत मानत करानी पड़ी .......

शाम लोटते वक़्त मूड बहुत ख़राब और ब्लड प्रेशर बड़ा हाई लग रहा था .. सोचा ऐसे मूड में घर जाने का क्या फायदा और जाकर घर में झगडा बढेगा .. इसलिए घर में फ़ोन कर दिया की आज Gym होते हुए बहार खाना खाते हुए आऊंगा ....

घर लोटते हुए सोच रहा था जाऊ तो कान्हा जाऊ,? कुछ समझ ना रहा  था कभी अकेला बार जाता नहीं था.. कभी कबाक किसी पार्टी या किसी दोस्त के बुलावे पे जाता था  .. फिर मन कड़ा कर के, घर के पास के इक Bar & Grill में घुस गया ...

वोह ,अकेला इन्सान बार में जाता है जिसका डाइवोर्स हो गया हो या जो नयी चिड़िया को इक रात के लिए धुंड रहा हो....... वैसे ही कुछ पुराणी थकी चिड़ियाँ जिनके पति उन्हें घर से भगा चुके थे या वोह बदनसीब..... जिन्हें अपने हुस्न को कैश (करने लायक हो तो ना )करना नहीं आता था  ..वैसी औरते  इस तरह की जगह पर खूब मिलती है..मेरी मज़बूरी थी की मैं इनके मापदंड में कंही फिट नहीं था .. खेर बार के काउंटर के साथ लगे इक स्टूल को पकड़ मेने भी अपना अड्डा जमा लिया और इक बीयर आर्डर कर दी .......

अभी बीयर की चुस्की मारी थी की मेरे बराबर के स्टूल पे में इक सुंदरी आकर बैठी और उसने  बार टेंडर को "मार्टीनीआर्डर की ...उसकी आवाज सुन मैं तनिक चोंका.... लगा, यह आवाज कुछ जानी पहचानी सी लगती है .... मेने अपना सर घुमा कर देखा तो उस सुंदरी को देख टका सा रह गया!.. .. अरे यह तो सुबह वाली पुलिस वाली सी  लगती है ...इस वक़्त वोह प्रोफेशनल औरतो वाले शानदार स्कर्ट ब्लाउज में थी उसके बाल पुरे खुले होकर उसके कंधे से निचे लहरा रहे थे और उसका खुबसूरत बदन अपनी ड्रेस के साथ नाइंसाफी  करता हुआ उससे बहार निकलने को बेताब लगता था .. .....

इस वक़्त उसे कोई भी देखता तो बिना पिए ही गिर जाता.... सारा बार उसे देख कर भी अनजान बन रहा था ... यह मेरे लिए बड़ी अजीब सी बात थी?….उसकी नाजुक नाजुक पतली लम्बी उंगलियों ने गिलास को अपने फंदे में ऐसे ले लिया जैसे वोह गिलास को आँख बंद करके इक जादूगर की तरह गायब कर सकती है ..सुबह उसकी सुन्दरता से मैं मदहोश था.... तो अब उसके रूप का जलवा मुझे अजीब सा तनाव दे रहा था ........

उसने मुझे घूरता देख... पूरी तरह अनदेखा कर दियाशायद  उसे पता था ऐसी जगह बेकार के लोग ही आते है ..उसकी नजरे बार बार दरवाजे पे घूम जाती थी.... लगता था... वोह किसी के आने का इन्तजार कर रही थी .. मेने उसे देखा और बोला.. तुम सुबह वाली पुलिसवाली हो ना? .. उसने अपना मुंह बिचका दिया और ऐसे दिखाया जैसे उसने मुझे अभी अभी पहली बार यंहा देखा है ..मैं भी उसके पीछे लग गया और बार बार अपनी बात कहने लगा ...... मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए उसने बोल दिया हाँ मैं ही हूँ जिसने तुम्हारा सुबह टिकट (चालान)काटा था ... अब अपना मुंह बंद करो और अपनी बीयर पे ध्यान लगाओ !   यंहा हम बहुत बड़े गंगस्टर को पकड़ने के इंतजार में है ..... अबकी बार तुम बोलो तो तुम्हे सीधा अन्दर कर दूंगी समझे !....

उसकी इस बेरुखी ने मेरे अन्दर के मर्द को जगा दिया और मैं सोचने लगा इसकी अकड़ थोड़ी ढीली करनी चाहिए.. .. यह नशे का सुरूर था या उसकी मस्त जवानी का .. मेने ऐसी हरकत कर डाली .. जो शायद मैं अपने होशो हावास में करने की कभी हिमाकत कम से कम इक पुलिसवाली के साथ ना करता!.... ...

उसने जैसे ही अगली बार दरवाजे की तरफ नजर घुमाई।मेने मौका देख उसकी ड्रिंक को हाथ मार कर गिर दिया और ऐसा शो करने लगा जैसे वोह इक दुर्घटना थी .. जैसे ही उसकी ड्रिंक काउंटर पे  गिरी ..वोह हडबडा कर हटी .. मेने मौका देख उसे झटका दे दिया जिससे ऐसा लगे मेने उसकी ड्रिंक से अपने कपडे बचाने के लिए हटा हूँ ...... इसी झटके में उसने मेरी बांह थाम ली और हम दोनों अपना संतुलन खो सीधे फर्श पर जा गिरे ....... वोह मुझे सॉरी कहने ही वाली थी की .. अचानक मेरे सर के उप्पर इक पटाखा फूटा और उसने मुझे निचे धकेल मेरे ऊपर लेट अपनी रिवाल्वर से उस दिशा में गोली दाग दी .. उसने रिवाल्वर बहार क्या निकाली  …मेरी साँस और होश दोनों उड़ गए और मैं आँख बंद कर दूसरी दुनिया में पहुँच गया ....

थोड़ी देर बाद मुझे होश आया तो वंहा कोई ना था .. बार टेंडर मेरे उप्पर पानी के छींटे मार रहा था और कह रहा था सर उठिए और यंहा से जाइये .. बार बंद हो चूका है .... अपने  लड्खडाते कदमो से अपनों को समेट, बार से बहार निकल आया .. आज से ज्यादा मनहूस दिन, शायद मेरी जिन्दगी में कभी आया ना था !..... अभी गाडी को निकाल कर, बार से बहार निकला ही था , की इक पुलिस की गाडी ने फिर मुझे रोक लिया .. इक पुलिस वाला आया और बोलातो पीकर चला रहे हो .. मैं बोला पिने का तो मिला मौका ही नहीं? सारी की सारी बीयर अन्दर बार में किसी बदमाश की फायरिंग में बह गयी ....उसने कहा.....मेरे सीनियर ऑफिसर तुमसे बार के अन्दर क्या हुआ? उसके  के बारे में बात करना चाहते है और ऐसा कह उसने अपनी गाड़ी आगे बढ़ा दी........

अब यह कौनसी नयी मुसीबत मेरे गले की हड्डी बन रही थी ....मैं अपनी गाडी में बैठा...... उस पुलिस ऑफिसर का इंतजार  करने लगा ..... देखा तो.... वोह सुबह वाली पुलिस वाली अपनी वर्दी में मेरी तरफ रही थी..... उसने अब अपना मेनका वाला रूप त्याग ,पुलिस वाला रूप धर लिया था  ......

उसने अपनी कैप हाथ में लेकर मुझे सख्त नजरो से घूरा और बोली.... तो..... तुम स्पीडिंग करते हो .. इतनी घटिया जगह भी आते हो .. बहुत ही बेकार इन्सान हो!... .. मैं बोला ..मैडम जी.... मैं तो बाल बच्चे वाला इक शरीफ आदमी हूँ .. आज का दिन मुझपे कुछ ज्यादा ही भारी हो गया है .... सुबह से आपको क्या देख लिया की ?...दिन भर नुकसान , डांट , बैजत्ति और  गोली.... यह है मेरा नसीब ........ 

उसने कुछ सोचा और कठोर आवाज में बोली.... अपना फ़ोन दो और उसने फोन पर मेरे घर में कहा... की .......Mr  कपिल  2 घंटे बाद घर आजायंगे .. पुलिस को उनकी गवाही चाहिएसरकारी करवाई है .. मेने बड़ी दयनीय नजर से उसे देखा .. अब वोह किस लफड़े में फंसा रही है .. उसने कहा मेरे साथ चलो .. मैं उसके साथ गिरता पड़ता चल दिया और सोचने लगा... अब वोह मुझे और गुंडों की तरह पीछे बैठा कर अपनी कार ले में जाएगी .. उसने आगे का दरवाजा खोल ....मुझे बैठने के लिए कहा तो मुझे बड़ी हैरानी हई  पर कुछ ना बोला! ...

सोचा, नजर भर देखने का तो यह इनाम!.... अगर कुछ और घूर लिया तो जाने क्या होगा? .. रास्ते भर चुप चाप  बैठा पुलिस थाने के सपने लेता रहा .. अचानक.. उसने अपनी गाड़ी इक ईमारत के पास आकर रोक दी ....और बोली.. चलो मेरे साथ .. उसके पीछे चलते चलते मैं इक अपार्टमेंट में गया .. उसने दरवाजा खोला और मेरा हाथ पकड़ के अन्दर ले गयी... .. और बोली तुम्हारे बयान को लिखने के लिए...... मैं अभी कागज और पेन लेकर आती हूँ ! ….. तब तक तुम आराम से बैठो और ऐसा कह...... वोह अन्दर किसी बेडरूम में चली गयी ...

ऐसी स्थिति में किस गधे को आराम सूझता .. मैं सुकड़ा सा बैठा हुआ उसके आने का इंतजार करने लगा .. थोड़ी देर बाद अन्दर का दरवाजा खुला ....की मेरे होश गायब हो गए .. वोह इक गुलाबी झीने से गाउन में मेनका के अवतार में मेरे सामने खड़ी थी .... उसके बदन की खुशबु उस तनाव भरे माहौल का मजाक उड़ाती हुयी लग रही थी .. उसके इक हाथ में रेड वाइन की बोतल और दुसरे हाथ में दो गिलास थे ... उसने बोतल और गिलास सामने पड़ी मेज पर रख दिए .... फिर दोनों गिलास में वाइन डाल .... इक गिलास मुझे पकड़ा कर दूसरा अपने हाथ में ले लिया और अपना जाम मुझे और मेरा जाम खुद पीने लगी ...थोड़ी देर बाद उसने अपना और मेरा गिलास मेज पर रख दिए और ...........

वोह सीधे मेरी गोद में आकर  बैठ गयी ... और उसने अपने होटों से मेरे डरते कांपते होटों को अपनी गिरफ्त में ले लिया .... वोह  बोली .. तुम्हारा आज दिन भर का हुआ नुकसान मैं पूरा कर दूंगी ...... तुमने जाने अनजाने ही सही पर मेरी जान बचायी थी .. और ऐसा कह उसने अपना गाउन उतार कर फैंक दिया और मेरे कपड़ो पे झपटने लगी ....... थोड़ी देर बाद जब तूफ़ान गुजर गया .......तो  मुझे ऐसा लग रहा था की... अगर जन्नत कंही है तो इससे ज्यादा हसीन नहीं हो सकती!... .. 
दिन भर की थकावट , चिडचिडापन , गुस्सा ना जाने कान्हा काफूर हो चूका था ........रात के बारह बज चुके थे .......

मैं बोला ,मुझे अब चलना चाहिए... घर पे सब फ़िक्र कर रहे होंगे .... उसने इक मस्त अंगडाई ली और मुझे अपनी तरफ खिंचा और बोली ...अभी अभी तो गिरफ्तार हुए हो और इतनी जल्दी रिहाई भी चाहिए .. मैं बोला ,इस गिरफ्तारी के लिए मैं खुद थाने चल कर जाऊंगा .. उसने इक लम्बी किस दी और बोली ....ऐसी गलती मत करना! ..

 समझो.... रात गयी बात गयीऔर ऐसा कह उसने अपने पुलिस वाली यूनिफार्म मेरे सामने पहनी और बोली... चलो तुम्हे घर छोड़ देती हूँ और सुबह अपनी गाडी बार से उठा लेना .......और इक बात याद रखना ..... फिर कभी इस तरह की बार के आस पास भी नजर मत आना ...नहीं तो ..ऐसा कह उसने अपनी उंगलियों से रिवाल्वर बना कर मुझे हवा में शूट कर दिया ....


By 
Kapil Kumar 


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